कठुला कंठवज्र केहरि नख राजत रुचिर हिये। धन्य सूर एको पल या सुख का सत कल्प जिये ॥

“The tiger's claw and neck-charm gleam upon His lovely chest; blessed is even a moment of this joy over living a hundred eons.”

— सूरदास
अर्थ

गले में कठुला और सुंदर हृदय पर शेर का नाखून सुशोभित है; सूरदास कहते हैं कि इस सुख का एक पल भी धन्य है, इसके बिना सौ कल्पों तक जीने का क्या लाभ?

विस्तार

इस पद में भक्तिकवि सूरदास बाल कृष्ण के मनमोहक रूप का अत्यंत मधुर वर्णन करते हैं। वे कहते हैं कि नन्हे कान्हा के गले में सुंदर कठुला और बाघ के नखों का आभूषण उनके वक्षस्थल पर बेहद शोभा पा रहा है। सूरदास जी कहते हैं कि बालकृष्ण की इस प्यारी छवि को यदि एक पल के लिए भी देख लिया जाए, तो जीवन सफल हो जाता है। इस दिव्य सुख के एक छोटे से क्षण के आगे सैकड़ों युगों तक जीना भी व्यर्थ है। यह भाव हमें बताता है कि सच्चे प्रेम और भक्ति से भरा एक पल भी संपूर्ण जीवन से कहीं अधिक मूल्यवान होता है।

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