गोरेनंद जसोदा गोरी तुम कत स्याम शरीर । चुटुकी दैदै हँसत ग्वाल सब सिखै देत बलवीर ॥

“Fair is Nanda, and fair is Yashoda—why then is your body dark as night? Snapping fingers, the cowherd boys all mock and laugh, as Balram spurs them on with delight.”

— सूरदास
अर्थ

नंद बाबा गोरे हैं और यशोदा भी गोरी हैं, फिर तुम्हारा रंग सांवला क्यों है? बलराम के सिखाने पर सभी ग्वाल-बाल चुटकी बजा-बजाकर तुम्हारा मज़ाक उड़ाते हुए हंसते हैं।

विस्तार

सूरदास जी के इस सुंदर पद में बालक कृष्ण अपनी मैया यशोदा के पास एक भोली शिकायत लेकर आते हैं। वे कहते हैं कि बड़े भैया बलराम उन्हें चिढ़ाते हैं कि नंदबाबा गोरे हैं और मैया भी गोरी हैं, फिर तुम्हारा रंग सांवला क्यों है? बलराम के बहकावे में आकर सारे ग्वाल-बाल भी चुटकी बजाकर हंसते हैं और मेरा मजाक उड़ाते हैं। यह पद बालकृष्ण के कोमल मन, दो भाइयों की नटखट नोकझोंक और मां की ममता के अनूठे बंधन को बड़े ही भावुक और मधुर रूप में सामने लाता है।

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