कहा कहौ एहि रिसके मारे खेलन हौं नहिं जातु । पुनि पुनि कहत कौन है माता कोहै तुमरो तातु ॥

“What shall I say? Out of sheer rage, I no longer go to play; Time and again they taunt me asking: who is your mother, and who your sire?”

— सूरदास
अर्थ

मैं क्या कहूँ, इसी गुस्से के कारण मैं खेलने नहीं जाता; वे बार-बार मुझसे पूछते हैं कि तुम्हारी माँ कौन है और तुम्हारे पिता कौन हैं।

विस्तार

महाकवि सूरदास के इस सुंदर पद में बालक कृष्ण का भोलापन और उनका रूठना बड़े ही प्यार से दर्शाया गया है। बाल कृष्ण अपनी मैया यशोदा से शिकायत करते हुए कहते हैं कि मां, मुझे इतना गुस्सा आ रहा है कि अब मैं बाहर खेलने नहीं जाऊंगा। सब ग्वाल-बाल मुझे बार-बार चिढ़ाते हैं और पूछते हैं कि तुम्हारी असली मां कौन है और तुम्हारे पिता कौन हैं। वे कान्हा के सांवले रंग पर ताना मारते हैं। एक रूठे हुए बच्चे की यह मासूम शिकायत और मां की ममता की चाहत इस पद को बेहद मार्मिक और मधुर बना देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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कहा कहौ एहि रिसके मारे खेलन हौं नहिं जातु । | Sukhan AI