“You promised it would grow like Balarama's braid, both long and thick; yet through every combing, plaiting, washing, and drying, it never falls to writhe like a serpent on the ground.”
तुम तो कहती थीं कि मेरी चोटी बलराम भैया की चोटी की तरह लंबी और मोटी हो जाएगी, और कंघी करते, गूंथते तथा नहलाते समय नागिन की तरह ज़मीन पर लोटने लगेगी।
सूरदास जी के इस पद में बाल कृष्ण अपनी माँ यशोदा से बड़ी मासूमियत से शिकायत कर रहे हैं। वे कहते हैं कि माँ, तुम तो कहती थीं कि दूध पीने से मेरी चोटी भी भैया बलराम की तरह लंबी और मोटी हो जाएगी। बालों को सुलझाते, गूँथते और धोते समय वह नागिन की तरह ज़मीन पर लोटने लगेगी। लेकिन मेरी चोटी तो वैसी की वैसी ही है। यहाँ कान्हा का भोलापन और माँ-बेटे के बीच का सहज प्रेम दिल को छू जाता है।
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