जसोदा कबहिं बढ़ैगी चोटी । किती बार मोहिं दूध पिवत भई यह अजहूँ हैं छोटी ॥

“O Yashoda, when will my braid ever grow? How often have I drunk milk, yet it remains just as short as before!”

— सूरदास
अर्थ

हे माँ यशोदा, मेरी चोटी कब बढ़ेगी? मुझे दूध पीते हुए इतना समय हो गया, फिर भी यह आज भी छोटी ही है।

विस्तार

सूरदास जी के इस प्यारे पद में बाल कृष्ण अपनी माता यशोदा से एक बड़ी ही भोली शिकायत कर रहे हैं। माता यशोदा उन्हें दूध पिलाने के लिए अक्सर यह कहती थीं कि दूध पीने से उनकी चोटी भी बड़े भाई बलराम की तरह लंबी हो जाएगी। कान्हा मासूमियत से पूछते हैं कि माँ, मेरी यह चोटी कब बढ़ेगी? मुझे दूध पीते हुए इतना समय बीत गया, कितनी बार मैंने दूध पिया, फिर भी यह वैसी की वैसी छोटी ही है। यह पद बालपन की सहज मासूमियत और माँ-बेटे के अनमोल वात्सल्य को बहुत ही मधुर रूप में दर्शाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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