हंसी के साथ यां रोना है मिस्ल-ए-क़ुलक़ुल-ए-मीना — शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
“Here laughter and weeping flow together, like the gurgling throat of the wine-flask; If someone burst into a peal of mirth, and it was taken well—what of it, what was taken?”
अर्थ
यहाँ हँसी के साथ रोना भी है, जैसे सुराही के गले से शराब निकलने की आवाज़ (क़ुलक़ुल)। अगर किसी ने ठहाका लगाया और वह अच्छे से निभ गया, तो इसमें कौन सी बड़ी बात है।
विस्तार
इस दुनिया में हँसी हमेशा आँसुओं के साथ मिली होती है, ठीक वैसे ही जैसे सुराही से शराब ढलते वक़्त एक आवाज़ उठती है। वह बोतल खुशी से गुनगुनाती है, पर उसमें रोने जैसी एक टीस भी छिपी होती है। शायर कहते हैं कि ज़िंदगी में कोई भी खुशी पूरी तरह दुख से अलग नहीं होती। तो अगर किसी ने पूरी खुशी में ठहाका भी लगाया, तो क्या हुआ? उस हँसी में भी गम का एक धागा बुना रहता है। सच्ची, बेदाग़ खुशी जैसी कोई चीज़ नहीं। हर खुशी के पल के साथ एक चुपचाप सी तकलीफ़ भी रहती है, जैसे मिठास और तड़प एक ही साँस में बसे हों।
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