उस रू-ए-ताबनाक पे हर क़तरा-ए-अरक़ — शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
“Upon that radiant face, each bead of glistening sweat is, as it were, a single star of spring's bright dawn.”
अर्थ
उस चमकते हुए चेहरे पर पसीने की हर बूँद ऐसी लगती है मानो वह बहार की सुबह का कोई सितारा हो।
विस्तार
शायर एक चमकते, दमकते चेहरे को निहार रहे हैं। उस रौशन चेहरे पर पसीने की नन्ही बूँदें झिलमिला रही हैं। वे कहते हैं कि हर बूँद ऐसी लगती है जैसे बहार की सुबह के आसमान में कोई सितारा हो। यह एक बहुत खूबसूरत तसव्वुर है, जिसमें महबूब का चेहरा सुबह के आसमान जैसा और पसीने की बूँदें उसमें बिखरे कोमल तारों जैसी लगती हैं। इसमें एक नरमी और हैरानी का एहसास है, जो पसीने की मामूली सी बूँद को भी चमकदार और कीमती बना देता है, जैसे खूबसूरती खुद उस पल को रौशन कर रही हो।
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