बुझने की दिल की आग नहीं ज़ेर-ए-ख़ाक भी — शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

बुझने की दिल की आग नहीं ज़ेर-ए-ख़ाक भी होगा दरख़्त गोर पे मेरी चनार का

“The fire of my heart will not be quenched, even beneath the dust; upon my grave there shall grow a chinar tree, blazing like flame.”

— शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

अर्थ

दिल की आग मिट्टी के नीचे भी नहीं बुझेगी; मेरी क़ब्र पर चनार का पेड़ उगेगा।

विस्तार

शायर कहते हैं कि उनके दिल में जो आग जल रही है, वह इतनी तेज़ है कि मिट्टी के नीचे दफ़न होने के बाद भी नहीं बुझेगी। वे कल्पना करते हैं कि उनकी क़ब्र पर एक चनार का पेड़ उगेगा। चनार के पत्ते पतझड़ में आग की तरह लाल हो जाते हैं, इसलिए वह पेड़ उनके भीतर जलते जुनून का जीता-जागता रूप बन जाता है। मौत और ऊपर पड़ी मिट्टी भी इस प्रेम की आग को ठंडा नहीं कर सकती। यह आग जलती रहती है, और पेड़ उसे ऊपर तक ले जाता है, मानो उनकी क़ब्र ज़िंदगी से भी लंबे चलने वाले जज़्बात की दहकती निशानी बन गई हो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.