ऐ ज़ौक़ गर हैं होश तो दुनिया से दूर भाग — शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
“O Zauq, if your senses are intact, flee far from the world's embrace— Within this tavern there's no work, no place, for one of sober grace.”
अर्थ
ऐ ज़ौक़, अगर तुममें होश है तो इस दुनिया से दूर भाग जाओ, क्योंकि इस मयख़ाने में होशियार आदमी के लिए कोई काम नहीं है।
विस्तार
ज़ौक़ यहाँ हल्की मुस्कान के साथ खुद से बात करते हैं। वे कहते हैं, ऐ ज़ौक़, अगर अब भी होश बाक़ी है तो इस दुनिया से दूर भाग जा। क्योंकि ज़िंदगी के इस मयख़ाने में होशियार और हिसाबी लोगों के लिए कोई जगह नहीं। यह ख़याल बहुत सुंदर और थोड़ा शरारती है। दुनिया, मयख़ाने की तरह, उन्हीं की है जो समर्पण कर देते हैं, जो खुद को भुलाकर प्रेम और मस्ती में डूब जाते हैं। जो हर क़दम तौलते और गिनते रहते हैं, वे इसके असली आनंद को कभी नहीं चख पाते। इसलिए शायर कहते हैं कि कभी-कभी असली समझदारी अपनी होशियारी खोने में ही है, दिल को पूरी तरह दे देने में।
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