शान करीम की ये है हाँ से हो पेशतर अता लुत्फ़ अता का क्या हो जब हाँ से हो पेशतर नहीं

“The glory of the Bountiful is to bestow before the plea is voiced; what joy is there in any gift that comes not before the 'yes'?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

सच्चे उदार दाता की शान यही है कि वह माँगने या 'हाँ' कहने से पहले ही अता कर दे; उस दान या मेहरबानी का क्या आनंद जो माँगने से पहले ही हासिल न हो।

विस्तार

यह शेर सच्चे दाता की शान और उसकी उदारता की नज़ाकत को बयान करता है। शायर कहते हैं कि किसी रहमदिल की असली बड़ाई इसमें है कि वह माँगने वाले की 'हाँ' या अर्ज़ी से पहले ही उसकी झोली भर दे। अगर किसी नेमत को देने से पहले इनकार की कड़वाहट झेलनी पड़े, तो बाद में मिलने वाले तोहफ़े की सारी मिठास और लुत्फ़ ख़त्म हो जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.