शातिर-ए-पीर-ए-आसमाँ वाह-री तेरी दस्तबुर्द ख़ुसरव ओ कैक़िबाद की तेग़ नहीं कमर नहीं

“O cunning player, aged sky, marvel at your ruthless theft: Neither the sword nor the waist of Khusraw and Kaiqubad is left.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

हे चालबाज़ बूढ़े आसमान! तेरी लूटमार का क्या कहना, ख़ुसरव और कैक़िबाद जैसे प्रतापी बादशाहों की न तो तलवार बची और न ही कमर का कोई नाम-ओ-निशान रहा।

विस्तार

शायर यहाँ वक़्त या आसमान को एक शातिर, पुराने बाज़ीगर की तरह देख रहा है, जो चुपके से इंसानों से सब कुछ छीन लेता है। देखिए कि वक़्त की इस लूट ने ख़ुसरव और कैक़ुबाद जैसे अज़ीम और ताक़तवर बादशाहों को भी नहीं बख़्शा—आज न उनकी शान वाली तलवारें बची हैं, और न वो कमर जिन पर वे कभी सजी थीं। यह शेर हमें बड़ी नफ़ासत से समझाता है कि दुनियावी ताक़त और रुतबा कितने फ़ानी हैं; आख़िरकार वक़्त के आगे सब कुछ ख़ाक में मिल जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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