नाला-कशी रक़ीब से मेरी तरह मुहाल है दिल नहीं हौसला नहीं ज़ोहरा नहीं जिगर नहीं

“To raise a lament like mine is impossible for the rival; he lacks the heart, the courage, the nerve, and the grit.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

रक़ीब (प्रतिद्वंद्वी) के लिए मेरी तरह आहें भरना या विलाप करना असंभव है। उसके पास न तो दिल है, न हौसला, न हिम्मत और न ही जिगर।

विस्तार

यहाँ शायर अपने और अपने रक़ीब यानी प्रतिद्वंद्वी के बीच का गहरा फ़र्क़ बयां कर रहा है। इश्क़ में आह भरना या दर्द का इज़हार करना कोई आसान काम नहीं, इसके लिए अंदर से पूरी तरह टूटने और फिर भी टिके रहने की ताक़त चाहिए। रक़ीब महज़ दिखावा तो कर सकता है, मगर सच्चे दर्द की आग में जलने के लिए जो जिगर, हौसला और गहरा दिल चाहिए, वह उसके पास कहाँ!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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