“O youthful down upon the cheek, if a blank page is what you seek, how could mere written words the tale of beauty ever speak?”
ऐ नए ख़त (गाल के रोएँ), अगर तुझे लिखने के लिए माशूक़ का गोरा रुख़सार ही चाहिए, तो फिर कोई तहरीर हुस्न की दास्तान क्या ख़ाक बयान कर सकेगी?
यहाँ शायर ने 'ख़त' लफ़्ज़ की ख़ूबसूरत दोहरी परतों का इस्तेमाल किया है, जिसका मतलब लिखावट भी है और महबूब के चेहरे पर उभरती हल्की दाढ़ी या रुख़सार का सब्ज़ा भी। महबूब के गोरे और दमकते गाल को एक कोरी नोटबुक या 'बयाज़' की तरह देखते हुए शायर उस नन्हें ख़त से सवाल करता है। बात का गहरा असर यह है कि जब महबूब का हुस्न ख़ुद बेमिसाल और लफ़्ज़ों से परे है, तो भला कोई तहरीर या लकीर उसकी दास्तान कैसे मुकम्मल कर सकती है।
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