कुंज-ए-क़फ़स से इक दिन होगी रिहाई अपनी मर जाएँगे तो आख़िर सय्याद किया करेगा

“From this corner of the cage, one day I shall be freed; after all, once I am dead, what will the hunter do?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

पिंजरे के इस कोने से एक दिन हमारी रिहाई ज़रूर होगी; आख़िर जब हम मर जाएँगे, तो शिकारी हमारा क्या कर लेगा?

विस्तार

यहाँ पिंजरे के कोने में बंद परिंदे और शिकारी का रूपक बेहद मार्मिक और गहरा है। शायर मौत को कोई हार नहीं, बल्कि ज़ुल्म और क़ैद से मुकम्मल आज़ादी का आख़िरी रास्ता मानता है। इसमें ज़ालिम सय्याद की बेबसी पर एक ख़ामोश तंज़ भी है कि जब जान ही नहीं बचेगी, तो फिर उसकी सलाख़ों की क्या औक़ात रह जाएगी?

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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