याक़ूब क़त्अ कर दें उम्मीद-ए-वस्ल दिल से यूसुफ़ सा बंदा कोई आज़ाद क्या करेगा

“Let Jacob sever from his heart all hope of sweet reunion; for who would ever set a captive slave like Joseph free?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

याक़ूब को अपने दिल से मिलन की उम्मीद पूरी तरह छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि यूसुफ़ जैसे अनमोल ग़ुलाम को भला कोई क्यों आज़ाद करेगा?

विस्तार

यह शेर हज़रत याक़ूब और हज़रत यूसुफ़ के मशहूर क़िस्से की तरफ़ इशारा करता है, जहाँ यूसुफ़ बेमिसाल हुस्न के मालिक थे और मिस्र में ग़ुलाम बना लिए गए थे। शायर बड़े दर्द और नज़ाकत से कहता है कि याक़ूब को अब मिलने की उम्मीद छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि जिस किसी के पास यूसुफ़ जैसा अनमोल ग़ुलाम होगा, वह भला उसे कभी आज़ाद क्यों करेगा? यहाँ जुदाई के ग़म के साथ-साथ महबूब के हुस्न की ऐसी लाज़वाब तारीफ़ है कि उसकी दिलकशी हर किसी को उम्र भर के लिए अपना क़ैदी बना लेती है।

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