“I shall drown and perish, leaving you with longing; when not even my dust remains, what will you ruin?”
हम डूब कर अपनी जान दे देंगे ताकि तुम्हें पछतावा रहे; जब हमारी राख या मिट्टी ही नहीं बचेगी, तो तुम किसे बर्बाद करोगे?
इस शेर में टूटे हुए दिल की बेपनाह पीड़ा के साथ-साथ एक गज़ब की ख़ुद्दारी और तेवर भी झलकता है। आशिक़ अपने बेदर्द महबूब से कहता है कि वह पानी में डूबकर जान दे देगा, ताकि मरने के बाद उसकी राख या ख़ाक का एक ज़र्रा भी न बचे जिसे महबूब अपने पैरों तले रौंद सके। अपने वजूद का नाम-ओ-निशान मिटाकर वह महबूब से सताने का हक़ भी छीन लेता है और उसे उम्र भर के एक ख़ालीपन और पछतावे के हवाले कर जाता है।
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