गुलशन-ए-फ़िरदौस पर क्या नाज़ है रिज़वाँ तुझे पूछ उस के दिल से जो है रुत्बा-दान-ए-लखनऊ

“Why boast so proudly, O Rizwan, of Eden's garden grand? Ask one whose heart has truly known the grace of Lucknow's land.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

ऐ रिज़वान (स्वर्ग के द्वारपाल), तुझे जन्नत के बाग़ पर इतना घमंड क्यों है? ज़रा उस शख्स के दिल से पूछ जो लखनऊ की शान और मर्तबे को समझता है।

विस्तार

शायर यहाँ जन्नत के दरबान 'रिज़वाँ' से बड़े प्यार और नज़ाकत से कहते हैं कि तुम्हें अपने स्वर्ग के बाग़ों पर इतना नाज़ क्यों है? अगर असली सुंदरता, नफ़ासत और सलीक़े को समझना है, तो उस इंसान से पूछो जिसने लखनऊ की शान और तहज़ीब को जी भरकर महसूस किया है। यह शेर लखनऊ के हुस्न और रूहानियत के नाम एक ख़ूबसूरत नज़राना है, जहाँ शहर की दिलकशी जन्नत पर भी भारी पड़ती है।

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