इस को रोकूँ मैं इलाही कि सँभालूँ उस को कि तड़पने लगे दिल और जिगर दोनों साथ

“Which shall I restrain, O God, or which one console, when both heart and soul begin to writhe beyond control?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

हे ईश्वर, मैं किसे रोकूँ और किसे सँभालूँ, क्योंकि दिल और जिगर दोनों एक साथ तड़पने लगे हैं।

विस्तार

यह शेर दिल और रूह पर टूटने वाले दर्द की उस इंतहा को दिखाता है, जहाँ इंसान बिल्कुल बेबस हो जाता है। उर्दू शायरी में 'दिल' जज़्बात का मर्कज़ है और 'जिगर' दर्द सहने की ताक़त, लेकिन जब मुहब्बत की तड़प दोनों पर एक साथ हावी हो जाए, तो समझ नहीं आता कि किसे सँभाला जाए और किसे रोका जाए। शायर खुदा के आगे अपनी बेबसी बयान कर रहा है, जैसे कोई इंसान दोनों हाथों से बिखरती हुई अपनी ही ज़िंदगी को समेटने की नाकाम कोशिश कर रहा हो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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