मुझ को हैरत है शब-ए-ऐश की कोताही पर या ख़ुदा आए थे क्या शाम-ओ-सहर दोनों साथ

“I marvel at the brevity of that night of delight; / O God, did dusk and dawn arrive together in one flight?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

मुझे आनंद की रात के इतने छोटे होने पर बहुत हैरानी है; हे ईश्वर, क्या शाम और सुबह दोनों एक साथ आ गए थे?

विस्तार

जब हम किसी ख़ास के साथ बेहद ख़ुश होते हैं, तो वक़्त जैसे पलक झपकते ही उड़ जाता है। इस शेर में शायर महबूब के साथ बिताई रात के इतनी जल्दी गुज़र जाने पर हैरान होकर पूछता है कि क्या शाम और सवेरा दोनों हाथ पकड़कर एक साथ ही चले आए थे? यह शेर इंसानी जज़्बात की उस सच्चाई को छूता है जहाँ ख़ुशी की घड़ियाँ बहुत छोटी और रुख़सत बहुत जल्द महसूस होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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