उठते हैं वलवले कुछ हर बार दर्द बन कर क्या जानिए जिगर को या दिल को ढूँडते हैं

“Surges of passion rise each time, turning into pain; who knows whether they search for the liver or the heart?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

हर बार कुछ जज़्बात और उमंगें दर्द बनकर उभरते हैं, न जाने वे जिगर की तलाश में हैं या दिल को ढूँढ रहे हैं।

विस्तार

यहाँ शायर ने बड़े मार्मिक अंदाज़ में दिखाया है कि जब भी भीतर कोई उमंग या जज़्बा जागता है, तो वह खुशी देने के बजाय फौरन एक टीस या दर्द में बदल जाता है। उर्दू शायरी में दिल मोहब्बत और उम्मीद का ठिकाना माना जाता है, जबकि जिगर ज़ख्मों और तकलीफ़ों को चुपचाप बर्दाश्त करने का प्रतीक है। शायर हैरान होकर पूछता है कि यह बेचैन दर्द आखिर किसे तबाह करने निकला है—उस दिल को जो सपने देखता है, या उस जिगर को जो हर चोट सहता है?

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