हसरत शबाब की है अय्याम-ए-शेब में भी मादूम की हवस है ज़ाइल को ढूँडते हैं

“Even in the days of old age, the longing for youth remains; we crave what is non-existent, seeking that which has faded away.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

बुढ़ापे के दिनों में भी जवानी की चाहत बनी हुई है; हम उस चीज़ की हवस पाले हुए हैं जो मिट चुकी है और जो ख़त्म हो चुका है उसे ढूँढ रहे हैं।

विस्तार

यह शेर इंसान के दिल की उस मासूम और बेबस ज़िद को बयां करता है जो कभी वक़्त की हक़ीक़त को कुबूल नहीं करती। बाल भले ही सफ़ेद हो चुके हों और बुढ़ापा दस्तक दे चुका हो, मगर दिल में जवानी की वही पुरानी तपिश और शोख़ी आज भी मचलती है। शायर कहता है कि हम इंसान भी कितने अजीब हैं, जो चीज़ अब मिट चुकी है और जिसका कोई वजूद नहीं रहा, सारी ज़िंदगी उसी गुज़रे हुए साए को ढूँढने में गुज़ार देते हैं।

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