तर्ज़-ए-करम की शाहिद हैं मेवा-दार शाख़ें इस तरह सर झुका कर साइल को ढूँडते हैं

“Fruit-laden boughs bear witness to the gracious art of generosity; bowing their heads so low, they seek out those who ask.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

फलों से लदी हुई डालियाँ उदारता और दानशीलता के तौर-तरीके की गवाह हैं, जो सिर झुकाकर इस तरह झुकती हैं मानो किसी याचक को ढूँढ़ रही हों।

विस्तार

यह शेर बड़प्पन और सच्ची दरियादिली की कितनी खूबसूरत मिसाल पेश करता है! शायर कहते हैं कि जब दरख़्त की शाख़ें फलों से लद जाती हैं, तो वे अकड़ने के बजाय झुक जाती हैं—मानो खुद किसी ज़रूरतमंद को ढूँढ़कर अपनी नेमतें सौंपना चाहती हों। सच्चा करम यही है, जहाँ देने वाले के अंदर कोई ग़ुरूर या अहसान नहीं होता, बल्कि बेपनाह आजिज़ी और विनम्रता होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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