इक लहर में न थे हम क्यूँ ऐ हबाब देखा यूँ आँख बंद कर के साहिल को ढूँडते हैं

“Were we not borne of the selfsame wave? Look now, O bubble, see: with our eyes closed tightly thus, we search for the distant shore.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

क्या हम एक ही लहर में नहीं थे? हे बुलबुले, क्या तुमने देखा कि हम इस तरह आँखें बंद करके किनारे को ढूँढते हैं?

विस्तार

यहाँ शायर पानी के बुलबुले (हबाब) से मुख़ातिब होकर ज़िंदगी की नापायदारी और इंसान की अंधी तलाश पर बात कर रहे हैं। बुलबुले की आँख का बंद होना दरअसल उसका फूट जाना या मिट जाना है, और शायर तंज़ करते हैं कि हम दोनों उसी एक लहर की पैदाइश हैं, फिर भी मंज़िल या साहिल को पाने के लिए आँखें मूँद कर भटक रहे हैं। यह एक ख़ूबसूरत फलसफा है कि इंसान अपनी नश्वरता को भुलाकर किसी ऐसे किनारे की तलाश में मिट जाता है, जिसे वह खुली आँखों से देख भी नहीं सकता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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