ऐ ख़िज़्र पय-ए-ख़जिस्ता बहर-ए-ख़ुदा करम कर भटके हुए मुसाफ़िर मंज़िल को ढूँडते हैं

“O Khizr of blessed foot, for God’s sake show some grace; lost travelers wander on, seeking their resting place.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

हे मुबारक क़दमों वाले ख़िज़्र! ख़ुदा के वास्ते रहम कीजिए, क्योंकि भटके हुए मुसाफ़िर अपनी मंज़िल को तलाश कर रहे हैं।

विस्तार

उर्दू शायरी और लोक-परंपरा में हज़रत ख़िज़्र को एक ऐसा मार्गदर्शक माना गया है, जो बियाबान में भटके हुए मुसाफ़िरों को रास्ता दिखाते हैं। यहाँ शायर ज़िंदगी के सफ़र में राह भूले इंसानों की ओर से ख़िज़्र से इल्तिजा कर रहा है कि वे अपने मुबारक़ क़दमों से रहनुमाई करें। यह शेर सिर्फ़ किसी सफ़र का ज़िक्र नहीं करता, बल्कि ज़िंदगी की उलझनों और रूहानी सुकून की तलाश में तड़पते दिल की दिली पुकार है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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