आया जो रहम मुझ पर इस में भी चाल है कुछ सीने पे हाथ रख कर अब दिल को ढूँडते हैं

“Even if pity stirs for me, some trick must lie in this art; placing a hand upon their breast, they search now for a heart.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

अगर उन्हें मुझ पर तरस आया भी है तो इसमें भी कोई चाल है, क्योंकि वे अपने सीने पर हाथ रखकर अब दिल तलाश कर रहे हैं।

विस्तार

यहाँ आशिक़ अपने महबूब की अचानक जागी हमदर्दी पर भी मीठा सा शक कर रहा है, क्योंकि उसे लगता है कि इस रहम में भी कोई न कोई नई चाल या अदाकारी छिपी है। महबूब अपने सीने पर हाथ रखकर यूँ दिखावा कर रहे हैं मानो सचमुच ढूँढ रहे हों कि उनके सीने में धड़कने वाला दिल मौजूद भी है या नहीं। इस शेर में पत्थरदिल माशूक़ पर एक बहुत ही दिलकश और शोख़ तंज़ है, जहाँ रहम का इज़हार भी एक फ़रेब सा महसूस होता है।

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