रहा करती है ये हैरत मुझे ज़ुहद-ए-रियाई पर ख़ुदा से जो नहीं डरता उसे बंदे का डर क्या हो

“I am left in endless wonder at this hypocritical piety: one who fears not God, why would he fear mortal man?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

मुझे दिखावे की परहेज़गारी और इबादत पर हमेशा अचरज होता है; जो इंसान ख़ुदा से ही नहीं डरता, उसे किसी इंसान का क्या डर होगा।

विस्तार

इस शेर में शायर ने दिखावे की परहेज़गारी और पाखंड पर बेहद खूबसूरत और तीखा तंज़ किया है। वह हैरान होकर पूछते हैं कि जो लोग सिर्फ़ दुनिया की वाहवाही लूटने के लिए नेकी का चोला ओढ़ते हैं, उनका सच क्या है। सीधी सी बात है कि जिसके दिल में ख़ुदा का सच्चा डर या एहसास ही नहीं, वह भला किसी इंसान की क्या परवाह करेगा। यह शेर हमें समझाता है कि असली इबादत ख़ामोश सच्चाई में होती है, न कि तमाशा बनकर दूसरों को छलने में।

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