कहा मैं ने असर मुतलक़ नहीं क्या संग-दिल है तू कहा जब दिल हो पत्थर का तो पत्थर पर असर क्या हो

“I said, 'Nothing moves you at all, how stone-hearted you are!' / She replied, 'When the heart is of stone, what impression could stone ever bear?'”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

मैंने कहा कि तुम पर कोई असर नहीं होता, तुम कितने पत्थर-दिल हो; इस पर उसने जवाब दिया कि जब दिल ही पत्थर का हो, तो पत्थर पर किसी चीज़ का क्या असर हो सकता है।

विस्तार

इस शेर में आशिक़ और माशूक़ के बीच का एक बेहद खूबसूरत और चुटीला संवाद है। आशिक़ अपनी बेबसी में शिकवा करता है कि उसकी किसी बात या आँसू का महबूब पर ज़रा भी असर नहीं होता, मानो उसका दिल पत्थर का हो। इस पर महबूब बड़ी बेबाकी और तंज़ से जवाब देता है कि जब दिल वाकई पत्थर का ही है, तो फिर उस पर किसी असर की उम्मीद रखना ही बेकार है। यह शेर बेरुखी के दर्द और इश्क़ की लाचारी को बड़ी सादगी से बयां करता है।

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