तू सताइश-गर है उस का जो है तेरा मद्ह-ख़्वाँ ये तो ऐ मुशफ़िक़ ज़मीर-ए-मर्हबा उल्टी फिरी

“You lavish praise on one who sings your praise in turn; / O kindly friend, the sense of 'well done' has turned around!”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

तुम केवल उसी की प्रशंसा करते हो जो तुम्हारी प्रशंसा करता है; ऐ मेहरबान दोस्त, यह तो प्रशंसा और शाबाशी का उलटा ही नियम बन गया है।

विस्तार

इस शेर में शायर आपसी चापलूसी और लेन-देन वाली तारीफ़ के खोखलेपन पर बड़ी नफ़ासत से चोट कर रहे हैं। दाद और सराहना का हक़दार तो वह होना चाहिए जिसमें कोई हुनर हो, मगर यहाँ तो सिलसिला बस इतना है कि तू मेरी बड़ाई कर और मैं तेरी। शायर हल्के से अफ़सोस के साथ कहते हैं कि सच्चा 'मर्हबा' यानी दिली वाहवाही का पूरा मक़सद ही यहाँ उल्टा पड़ गया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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