जो बड़ा बोल एक दिन बोले थे पेश आया वही गुम्बद-ए-गर्दूं से टकरा कर सदा उल्टी फिरी

“The boastful words I spoke one day have returned to face me now; crashing against the dome of heaven, the echo rebounded back.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

एक दिन जो घमंड और शेखी भरी बातें कही गई थीं, आज वही सामने आ गई हैं; ठीक वैसे ही जैसे आसमान के गुंबद से टकराकर आवाज़ वापस लौट आती है।

विस्तार

इस शेर में शायर अहंकार और कर्म के चक्र की बात बहुत खूबसूरती से समझाते हैं। उन्होंने आसमान को एक विशाल गुम्बद माना है, जहाँ इंसान के घमंड में बोले गए अल्फाज़ टकराकर गूँज की तरह उसी के पास वापस लौट आते हैं। यह एक बेहद नम्र और विचारशील पैगाम है कि जो गुरूर हम ज़माने के सामने जताते हैं, ज़िंदगी आखिरकार उसी को हमारे सामने एक चुनौती बनाकर पेश कर देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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