“Either the boat was sinking or drifting far from the shore; Alas, what despair! Even when the wind turned, it turned adverse once more.”
या तो नाव डूब रही थी या किनारे से दूर जा रही थी। अफ़सोस कि बदकिस्मती ऐसी रही कि हवा का रुख बदला भी तो उल्टी दिशा में ही बदला।
शायर यहाँ ज़िंदगी की तुलना भंवर में फंसी एक नाव से कर रहे हैं, जो या तो डूबने की कगार पर है या किनारे से और दूर बहती जा रही है। जब किस्मत बदलने की ज़रा सी उम्मीद बंधी और हवा का रुख बदला भी, तो वह उल्टी दिशा में बहने लगी यानी मुश्किलें घटने के बजाय और बढ़ गईं। यह शेर उस गहरी बेबसी और बदकिस्मती का दर्द बयां करता है, जहाँ हर उम्मीद ही इंसान के खिलाफ खड़ी नज़र आती है।
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