सुनते ही इस बहार से निकला कि चुपके तईं — नज़ीर अकबराबादी

सुनते ही इस बहार से निकला कि चुपके तईं दिल देखते ही हो गया शैदा बसंत का

“The moment I heard of this springtime, so softly it slipped out, the heart, at the very first sight, grew mad with love of spring.”

— नज़ीर अकबराबादी

अर्थ

इस बहार की बात सुनते ही दिल चुपके से निकल पड़ा, और पहली ही नज़र में बसंत के प्रेम में दीवाना हो गया।

विस्तार

यह शेर एक ऐसे दिल की बात कहता है जो पहली ही नज़र में प्रेम में डूब जाता है। जैसे ही शायर ने इस खिलती हुई सुंदरता के बारे में सुना, वह चुपचाप उसकी ओर खिंचा चला गया। और जिस पल उसकी आँखों ने उसे सचमुच देखा, उसका दिल पूरी तरह खो गया, मानो किसी पर मोहित हो गया हो। यहाँ बसंत का ज़िक्र ताज़गी, रंग और खुशी की ओर इशारा करता है। शायर कह रहा है कि प्रेम दो कदमों में उस पर छा गया। पहले खबर ने भीतर कुछ जगाया, फिर दीदार ने पूरी तरह बाँध लिया। यह उस कोमल क्षण की तस्वीर है जब सुंदरता पल भर में दिल चुरा लेती है, और इंसान बसंत की तरह खिल उठता है।

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