सब्र नहीं शाम-ए-फ़िराक़ आजको — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“No patience left this evening of our parting today— by God, you were so weary that you drifted off to sleep.”
अर्थ
आज जुदाई की इस शाम में सब्र नहीं रहा—ख़ुदा की क़सम, तुम इतनी थकी हुई थीं कि सो गईं।
विस्तार
यह शेर जुदाई से थके हुए दिल की बात कहता है। शायर कहते हैं कि आज इस बिछड़ने की शाम में अब कोई सब्र बाक़ी नहीं रहा। अलग होने का दर्द इतना भारी हो गया है कि उसे चुपचाप सहना मुश्किल है। इसमें एक शिकायत भी है और इंतज़ार से एक थकान भी। ऐसा लगता है कि महबूब थक कर नींद में चला गया, और चाहने वाला बेचैन भावनाओं के साथ जागता रह गया। यह उस तन्हा घड़ी को बयान करता है जब एक इंसान सुकून से सो रहा होता है और दूसरा तड़प और बेख़्वाबी में डूबा रहता है। यहाँ भावना कोमल पर उदास है, उस दिल की ख़ामोश पीड़ा जिसे प्यार दूर महसूस होने पर चैन नहीं मिलता।
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