दिल न पहरा जान ही ठहरी ख़ुदा — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“The heart I did not guard, the soul alone stayed, O God— This much I did not know: that one, he went away somewhere.”
अर्थ
मैंने दिल की रखवाली नहीं की, बस जान ही ठहरी रही, ऐ ख़ुदा। यह बात तो मुझे मालूम ही न थी कि वह तो कहीं चला गया।
विस्तार
यह शेर एक बेचैन दिल और एक अशांत रूह की बात करता है। शायर कहता है कि न दिल ठहरा, न जान को क़रार आया, और इस बेबसी में ख़ुदा को पुकारना ही बचता है। एक खोया हुआ-सा एहसास है, किसी सहारे की तलाश है। फिर आता है जुदाई का वह दर्द: इससे पहले कि हम समझ पाते कि हो क्या रहा है, महबूब तो चला ही गया। यह उस लाचार पल को बयान करता है जब कुछ हमारी पकड़ से इतनी तेज़ी से निकल जाता है कि हाथ में बस ख़ालीपन और होंठों पर ख़ुदा का नाम रह जाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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