उठिए जल्दी से टपक को मैं — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“Rise swiftly, for I am slipping away, drop by drop; Look, not only the heart but the very garden has drained to its depths.”
अर्थ
जल्दी उठिए, क्योंकि मैं बूँद-बूँद करके ढल रहा हूँ; देखो, सिर्फ़ दिल ही नहीं बल्कि पूरा बाग़ भी अपनी गहराई तक ख़ाली हो गया है।
विस्तार
इस शेर में एक गहरा खालीपन और विछोह का एहसास है। शायर कहता है कि जल्दी उठो, क्योंकि कुछ क़ीमती बूँद-बूँद करके ढल रहा है। फिर आती है वह पीड़ा: सिर्फ़ दिल ही खाली नहीं हुआ, बल्कि बाग़ भी सूना और उजड़ा पड़ा है। यह उस उम्मीद की तस्वीर है जो कभी खिली थी और अब चुप पड़ी है। फूल झड़ गए, खुशियाँ बह गईं, और बाक़ी रह गया एक सन्नाटा। शायर धीरे से याद दिलाता है कि भरापन कितनी जल्दी वीरानी में बदल जाता है, और जीवन की रौनक पलक झपकते ओझल हो जाती है। यह नश्वरता पर एक कोमल, उदास चिंतन है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
