वस्ल की शब शाम से मैं गया — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“The night of union left me from the eve, the pangs of parting turned to grief I grieve.”
अर्थ
मिलन की रात शाम से ही बीत गई, और विरह की हालत एक आफ़त बन गई।
विस्तार
यह शेर मिलन की रात के बाद जुदाई की पीड़ा को बयान करता है। शायर कहता है कि मिलने की उसी शाम से जैसे कुछ हाथ से फिसलने लगा, मानो नज़दीकी पहले ही धुंधली पड़ने लगी हो। और फिर बिछड़ने की हालत एक सच्ची मुसीबत बन गई, एक ऐसा बोझ जिसे सहना लगभग नामुमकिन है। यह उस खट्टे-मीठे एहसास को पकड़ता है, जब साथ के पल भी आने वाली जुदाई की परछाई लिए होते हैं। पास होने की खुशी नाज़ुक है, पर दूर होने का दर्द दिल पर किसी आफत की तरह छा जाता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
