ज़ुल्फ़ की बू आएगी हमको मगर — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“The fragrance of her tresses shall come to me, perhaps— / yet to the rival's cruel hand the bunch of evening-blooms is gone.”
अर्थ
शायद ज़ुल्फ़ की ख़ुशबू हम तक पहुँच जाए, मगर शब-बू के फूलों का गुच्छा तो रक़ीब के ज़ालिम हाथ में चला गया।
विस्तार
शायर यहाँ चाहत और रश्क़ को एक साथ बयान करते हैं। उन्हें उम्मीद है कि महबूब की ज़ुल्फ़ की ख़ुशबू उन तक पहुँचेगी, मगर इसमें एक कड़वा मोड़ है। रात में खिलने वाले शब-बू के फूलों का गुलदस्ता तो किसी और, यानी रक़ीब के पास चला गया। तो जहाँ वे उस प्यारी ख़ुशबू की एक झलक का इंतज़ार कर रहे हैं, वहीं उन्हें एहसास होता है कि फूलों का तोहफ़ा और महबूब की तवज्जोह किसी और को मिल गई। यह शेर मोहब्बत की उस नाज़ुक टीस को दिखाता है, जिस पर रक़ीब का साया पड़ा हो। दिल में एक ही पल में उम्मीद और टूटन दोनों बसी हैं।
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