कुछ अपनी ही नसीब की ख़ूबी थी बाद-ए-मर्ग — मोमिन ख़ाँ मोमिन

कुछ अपनी ही नसीब की ख़ूबी थी बाद-ए-मर्ग हंगामा-ए-मोहब्बत-ए-अग़्यार कम हुआ

“It was but my own fortune's grace that after I lay dead, the tumult of my rivals' love for her at last grew less.”

— मोमिन ख़ाँ मोमिन

अर्थ

यह मेरे ही नसीब की कुछ ख़ूबी थी कि मेरे मरने के बाद मेरे प्रतिद्वंद्वियों के प्रेम का हंगामा कम हो गया।

विस्तार

शायर अपनी किस्मत पर हल्की सी तंज़ के साथ बात करता है। वह कहता है कि उसकी मौत के बाद ही प्रतिद्वंद्वियों की मोहब्बत का शोर कुछ कम हुआ। जीते जी तो वह उन लोगों से घिरा रहा जो महबूब की तवज्जोह के लिए होड़ करते थे, और वह हंगामा कभी थमता नहीं दिखता था। जब वह चला गया, तभी सब कुछ शांत हुआ। इसमें एक मीठी सी उदासी और मज़ाक है, मानो वह कह रहा हो, कैसी अजीब किस्मत है मेरी, कि सुकून तब मिला जब मैं रहा ही नहीं। यह उस दिल की तन्हाई और शांत हार को दर्शाता है जिसे चैन बहुत देर से मिला।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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