ख़बर नहीं कि उसे क्या हुआ पर उस दर पर — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“No news of what befell him, yet upon that door there seems a trace, a sign, as of the messenger of yore.”
अर्थ
पता नहीं उसे क्या हुआ, मगर उस दरवाज़े पर कोई निशान या चिह्न दिखाई देता है, जैसे किसी संदेश ले जाने वाले का हो।
विस्तार
शायर को यह नहीं मालूम कि उसने जो क़ासिद अपने महबूब के पास भेजा था, उसका क्या हुआ। उसकी कोई ख़बर नहीं। फिर भी जब वह महबूब के दरवाज़े की ओर देखता है, तो उसे वहाँ उस क़ासिद का कोई धुँधला निशान या साया दिखाई देता है। यह उम्मीद का धोखा भी हो सकता है, या सच भी। किसी ख़बर के लिए तड़पता दिल हर जगह निशान ढूँढ़ता है। बेयक़ीनी में भी वह चाहत उसी दर पर नज़रें जमाए बैठी रहती है, इस आस में कि कुछ तो आएगा।
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