दिल ऐसी शोख़ को मोमिन ने दी या कि वो ही — मोमिन ख़ाँ मोमिन

दिल ऐसी शोख़ को मोमिन ने दी या कि वो ही मुहिब-ए-हुसैन का और दिल रहे शिमर का सा

“Did Momin give his heart to one so wanton, or was it she— that a lover of Husain should bear a heart like Shimr's own?”

— मोमिन ख़ाँ मोमिन

अर्थ

मोमिन ने अपना दिल ऐसी चंचल महबूबा को दिया, या वही ऐसी निकली कि हुसैन के प्रेमी का दिल शिमर के दिल जैसा (निर्दयी) हो गया।

विस्तार

इस शेर में शायर महबूब के दिल के एक अजीब विरोधाभास पर हैरान है। उसने अपना दिल ऐसे शोख़ और चंचल इंसान को दे दिया, और सोचता है कि एक ही दिल में दो उलटी भावनाएँ कैसे रह सकती हैं। एक ओर महबूब हुसैन से मुहब्बत करने वाला लगता है, जो नेकी और भक्ति की मिसाल हैं। दूसरी ओर वही दिल शिमर जैसा बन जाता है, जो ज़ुल्म और बेरहमी का प्रतीक है। आसान शब्दों में, महबूब कोमल भी है और बेरहम भी, मेहरबान भी और संगदिल भी, सब एक साथ। शायर हैरान और थोड़ा दुखी है कि जिसे वह चाहता है, उसके दिल में इतनी मिठास और इतनी सख़्ती एक साथ बसी है।

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