जुनून की जोश से बेगाना-वार हैं अहबाब — मोमिन ख़ाँ मोमिन

जुनून की जोश से बेगाना-वार हैं अहबाब हमारा हाल वतन में हुआ सफ़र का सा

“My friends are strangers now to passion's fervent flame; At home I feel as if I journey, far from aim.”

— मोमिन ख़ाँ मोमिन

अर्थ

मेरे मित्र जुनून के जोश से अनजान और उदासीन हो गए हैं; अपने ही वतन में मेरी हालत ऐसी हो गई है जैसे मैं किसी सफ़र में हूँ।

विस्तार

शायर एक गहरी तन्हाई महसूस कर रहा है। उसके दोस्त और प्रिय लोग अब उसके जुनून, उसकी भीतरी आग को नहीं समझते। वे अजनबियों की तरह बर्ताव करते हैं, मानो उसके दिल की तड़प उन्हें छूती ही नहीं। इसी वजह से अपने ही वतन में रहना भी पराया सा लगता है। वह अपने ही लोगों के बीच, अपनी ही ज़मीन पर है, फिर भी ऐसा लगता है जैसे किसी अनजान जगह का मुसाफ़िर हो। कोई भी उसके जज़्बात को सच में नहीं समझता। यह शेर उस दर्द को बयान करता है जब अपनों के बीच भी इंसान अकेला पड़ जाता है और अपनेपन का एहसास खो जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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