बेह नातवाँ हूँ कि हूँ दर नज़र नहीं आता — मोमिन ख़ाँ मोमिन

बेह नातवाँ हूँ कि हूँ दर नज़र नहीं आता मेरा भी हाल हुआ तेरी ही कमर का सा

“So frail am I that even in sight I cannot be seen— my state too has become like that of your slender waist.”

— मोमिन ख़ाँ मोमिन

अर्थ

मैं इतना कमज़ोर हूँ कि दिखाई तक नहीं देता; मेरी हालत भी तेरी पतली कमर जैसी हो गई है, जो नज़र में मुश्किल से आती है।

विस्तार

शायर कह रहा है कि मैं इतना कमज़ोर और दुर्बल हो गया हूँ कि अब मुश्किल से दिखाई देता हूँ। मैं जैसे धीरे-धीरे मिटता जा रहा हूँ। फिर वह एक प्यारी तुलना करता है। कहता है कि मेरी हालत अब बिल्कुल तेरी कमर जैसी हो गई है, जो इतनी नाज़ुक और पतली है कि वह भी मानो नज़र ही नहीं आती। यहाँ एक मीठा-सा खेल है। एक तरफ़ वह अपनी कमज़ोरी का दुख बयान करता है, और दूसरी तरफ़ महबूब की बारीक, नाज़ुक कमर की तारीफ़ करता है। दोनों हालतें एक ही छवि में मिल जाती हैं, दोनों इतनी हल्की कि आँखों से ओझल। यह चाह और तारीफ़ का कोमल मेल है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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