ज़रा हो गर्मी-ए-सोहबत तो ख़ाक कर दी चर्ख़ — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“Should the warmth of my company but kindle, I would reduce the very heavens to ash; My ecstasy is like the laughing bloom of a flying spark.”
अर्थ
अगर मेरी संगत की गर्मी ज़रा भी भड़क उठे तो मैं आकाश को राख कर दूँ; मेरी मस्ती उड़ती हुई चिंगारी की हँसती हुई खिलावट जैसी है।
विस्तार
शायर अपनी ख़ुशी की तुलना एक चिंगारी की पल भर की मुस्कान से करता है। चिंगारी बस एक लम्हे के लिए चमकती है और फिर राख बन जाती है। इसी तरह, संगत की गर्मी जैसे ही गहरी और तेज़ होती है, वह मानो ख़ुद को जलाकर मिट्टी में मिल जाती है। यहाँ एक मीठा-सा दर्द छिपा है। ख़ुशी सच्ची और चमकदार है, पर वह बहुत कम समय तक रहती है, बस एक पल ठहरती है और फिर खो जाती है। शायर मान लेता है कि उसका आनंद अपने स्वभाव से ही क्षणिक है, उस चिंगारी की तरह जो एक बार मुस्कुराकर बुझ जाती है।
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