बुझ गई इक आह में शम्अ-ए-हयात — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“In a single sigh the candle of my life was snuffed away; it was my own cold breath that chilled me into death's dismay.”
अर्थ
एक ही आह में जीवन की मोमबत्ती बुझ गई; मेरी अपनी ठंडी सांस ने ही मुझे ठंडा कर दिया।
विस्तार
शायर अपने जीवन को एक दीये की लौ से जोड़ता है। वह कहता है कि उसकी ज़िंदगी की शमा सिर्फ़ एक आह से बुझ गई। एक ही गहरी, ठंडी, दर्द भरी सांस इतनी काफ़ी थी कि उस लौ को बुझा दे। उस ठंडी आह ने उसे बिलकुल ठंडा कर दिया, मानो सारी गर्मी और जान निकल गई हो। यह बताने का एक कोमल तरीक़ा है कि दुख इतना गहरा हो सकता है कि एक ही दर्द भरी सांस किसी की ज़िंदगी ख़त्म कर दे। एक सांस से बुझती लौ की यह तस्वीर उदासी को नाज़ुक और गहरा बना देती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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