सच ही सही आप का पैमान-ए-वफ़ा — मोमिन ख़ाँ मोमिन

सच ही सही आप का पैमान-ए-वफ़ा मर्ग ने कब वादा-ए-फ़र्दा किया

“Granted, true indeed is your pledge of faithfulness— yet when did death ever promise a tomorrow?”

— मोमिन ख़ाँ मोमिन

अर्थ

माना कि आपकी वफ़ा का वादा सच्चा है, लेकिन मौत ने कब कल का वादा किया है?

विस्तार

शायर नरमी से वफ़ा के एक वादे पर सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं, ठीक है, मान लेते हैं कि आपकी वफ़ादारी का वादा सच्चा है। पर एक खामोश विडंबना यहाँ छिपी है: मौत ने कभी कल का वादा नहीं किया। हम सोचते हैं कि हमारे वादे बने रहेंगे, कि अपनी बात निभाने के लिए एक और दिन ज़रूर मिलेगा। मगर मौत ऐसा कोई भरोसा नहीं देती। वह बिना किसी चेतावनी के, किसी भी वादे के पूरे होने से पहले आ सकती है। इसलिए शायर याद दिलाते हैं कि हमारे वादे कितने नाज़ुक हैं, इसलिए नहीं कि लोग झूठे हैं, बल्कि इसलिए कि ज़िंदगी खुद अनिश्चित है। यहाँ कोमलता है, और हल्की उदासी भी, जो हमें इसी पल में प्यार और वफ़ा को सँजोने का न्योता देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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