दावा-ए-तकलीफ़ से जल्लाद ने — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“With his plea of suffering, the executioner On Judgment Day once more has slain his own self.”
अर्थ
जल्लाद ने तकलीफ़ पहुँचाने के अपने दावे के साथ, क़यामत के दिन फिर से अपने ही आप को क़त्ल कर लिया।
विस्तार
कल्पना कीजिए क़यामत के दिन की। जल्लाद, जिसने कभी किसी की जान ली थी, अब ख़ुद मुल्ज़िम बनकर खड़ा है। जब वह यह दावा करता है कि क़त्ल करते समय उसे भी तकलीफ़ हुई थी, तो यही बात उसके ख़िलाफ़ चली जाती है। उसकी शिकायत ही उसका इक़रार बन जाती है। ख़ुद को बचाने की कोशिश में वह अपना गुनाह मान लेता है, और फ़ैसले के दिन मानो अपने ही शब्दों से दोबारा क़त्ल हो जाता है। यह शेर धीरे से याद दिलाता है कि हमारे बहाने कभी-कभी हमारे ही विरुद्ध हो जाते हैं। जो हम सफ़ाई समझकर कहते हैं, वही हमारी ग़लती उजागर कर देती है। यहाँ एक गहरी विडंबना छिपी है।
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