रहम-ए-फ़लक और मेरे हाल पर — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“The mercy of the heavens, and upon my plight— you showed me grace, O cruel tormentor of mine.”
अर्थ
आसमान की दया और मेरी हालत पर—तूने ऐ ज़ुल्म ढाने वाले मुझ पर कृपा की।
विस्तार
शायर यहाँ आसमान से, यानी अपनी किस्मत से, एक नरम तंज़ के साथ बात करता है। वह उसे सितम ढाने वाला कहता है, जो अक्सर तकलीफ़ देता रहा है। पर अब, उसकी टूटी हुई हालत देखकर, यही कठोर आसमान भी मानो मेहरबान हो गया है। इसमें एक मीठी-कड़वी भावना है। शायर को हैरानी होती है कि जो उसे दुख देकर खुश होता था, वह आख़िरकार पिघल गया। शायद यह सच्ची दया है, या शायद उसका हाल इतना दयनीय है कि सितम भी आगे नहीं चल सकता। इन थोड़े से शब्दों में दर्द भी है और उसी ताक़त के प्रति एक चुपचाप, भीगी हुई कृतज्ञता भी, जिसने कभी उसे ग़म दिया था।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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