जाती थी तेरी मेरे लिए जाँ ही — मोमिन ख़ाँ मोमिन

जाती थी तेरी मेरे लिए जाँ ही ग़ैर से क्यों शिकवा-ए-बेजा किया

“My very life was slipping away for your sake— why then did I vainly reproach my rival?”

— मोमिन ख़ाँ मोमिन

अर्थ

मेरी जान तेरे लिए जा रही थी, फिर मैंने ग़ैर से बेजा शिकायत क्यों की?

विस्तार

शायर अपने महबूब को उसके ही जज़्बात याद दिलाता है। वह कहता है कि तेरी जान भी तो मेरे लिए ही निकली जा रही थी, तू मुझसे उतनी ही बेताब थी जितना तूने ज़ाहिर नहीं किया। तो फिर तूने ग़ैर से बेजा शिकवा क्यों किया? किसी और पर नाहक़ इल्ज़ाम क्यों लगाया, जबकि उसका कोई असली कारण ही नहीं था? यह एक नाज़ुक पल है जहाँ आशिक़ बताता है कि महबूब का दिल तो पहले से उसी का था, इसलिए किसी अजनबी पर दिखाया गया वह गुस्सा बेमतलब और बेजा था।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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