कुछ ही बन आती नहीं क्या कीजिए — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“Nothing at all comes right now, what is there to do? Her falling out with me has wrought such ruin anew.”
अर्थ
अब कुछ भी ठीक नहीं बन पड़ता, क्या करें। उसके रूठ जाने ने ऐसा कुछ कर दिया कि सब बिगड़ गया।
विस्तार
यह शेर उस पल की बात करता है जब कितनी भी कोशिश करो, कुछ बनता ही नहीं। शायर बेबस होकर कहता है कि जाने क्यों बात बनती नहीं, तो आख़िर क्या किया जाए? फिर असली दर्द सामने आता है: उस महबूब का रूठ जाना, उसका नाराज़ होना, कुछ ऐसा असर कर गया कि सब कुछ बिगड़ गया। जब आपका प्यारा आपसे नाराज़ हो जाए, तो मानो पूरी दुनिया उलट-पुलट हो जाती है। शायर इस एहसास के आगे झुक जाता है और मानता है कि महबूब की नाराज़गी में इतनी ताक़त है कि वह चुपचाप सारी कोशिशों और दिल के सुकून को बिगाड़ देती है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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