बेचारा करो क़ाबिल-ए-दर्माँ नहीं यह दर्द — मोमिन ख़ाँ मोमिन
“Make me helpless, yet this pain admits no cure— else I am so mad with longing that I say nothing at all.”
अर्थ
मुझे बेबस कर दो, पर यह दर्द इलाज के क़ाबिल नहीं है; वरना मुझे तो ऐसा जुनून है कि मैं कुछ नहीं कहता।
विस्तार
शायर एक ऐसे दर्द की बात करता है जिसका कोई इलाज नहीं है। वह कहता है कि मुझ पर तरस खाओ, क्योंकि यह पीड़ा लाइलाज है। फिर भी उसकी ख़ामोशी में एक गहरा सुकून और स्वाभिमान छिपा है। वह कहता है कि इस बेबसी में भी मैं अपना दुख अपने भीतर ही रखता हूँ। मैं शिकायत नहीं करता, मैं चीख़ता नहीं, मैं अपने दर्द को शब्दों में नहीं कहता। इतने भारी बोझ को चुपचाप सहने में एक तरह का दीवानापन है। यह शेर उस कोमल ताक़त को दिखाता है, जिसमें इंसान खुलकर गिला करने के बजाय गरिमा के साथ चुप रहकर अपना ग़म सहता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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