उस कूचा की हवा थी कि मेरी ही आह थे — मोमिन ख़ाँ मोमिन

उस कूचा की हवा थी कि मेरी ही आह थे कोई तो दिल की आग की पंखा सा झल गया

“Was it the breeze of that lane, or were they my own sighs? Something, like a fan, fanned the fire of my heart aflame.”

— मोमिन ख़ाँ मोमिन

अर्थ

क्या वह उस गली की हवा थी या मेरी ही आहें थीं; किसी ने पंखे की तरह मेरे दिल की आग को हवा देकर भड़का दिया।

विस्तार

शायर सोच रहा है कि उसके दिल में जलती आग को किसने भड़काया। क्या वह उस महबूब की गली की हवा थी, या फिर उसकी अपनी गहरी आहें? जो भी हो, किसी चीज़ ने उस आग को और तेज़ कर दिया, जैसे दहकते अंगारों पर कोई पंखा झल रहा हो। यह इश्क़ की तड़प की एक नाज़ुक तस्वीर है। मोहब्बत का दर्द कम नहीं होता, बल्कि बढ़ता जाता है, महबूब की गली की याद से और शायर की अपनी बेचैन साँसों से। वह ठीक से नहीं कह पाता कि उसका दर्द किसने गहरा किया, पर उसकी तपिश वह साफ़ महसूस करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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